डॉ. सुजीत कुमार बाजपेयी ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से पर्यावरण विज्ञान में एम.एससी., एम.फिल. एवं पीएच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जनवरी 2001 में एन.एच.पी.सी. लिमिटेड (एक नवरत्न सीपीएसई) में पर्यावरण अधिकारी के रूप में की, जहाँ उन्होंने लगभग 19 वर्षों तक फरीदाबाद मुख्यालय एवं उत्तर-पूर्व क्षेत्र की विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं पर कार्य किया। इस अवधि के दौरान उन्होंने जलविद्युत विकास से संबंधित स्थिरता और पर्यावरणीय-कानूनी मुद्दों में व्यापक अनुभव प्राप्त किया।
अपनी विशेषज्ञता, समस्या-समाधान क्षमता और अनुकूलनशीलता के लिए पहचाने जाने पर, उनका चयन वर्ष 2019 में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा भारत सरकार की लैटरल एंट्री योजना के तहत पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में किया गया। अगले पाँच वर्षों में उन्होंने प्रभाव आकलन, तटीय विनियमन क्षेत्र, नीति एवं विधि, आर्द्रभूमि तथा अनुपालन निगरानी जैसे प्रमुख प्रभागों का नेतृत्व किया और सिंगल-विंडो ग्रीन क्लीयरेंस पोर्टल PARIVESH 2.0 के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पर्यावरण एवं तटीय विनियमन क्षेत्र अनुमोदनों में महत्वपूर्ण सुधार लागू किए तथा जैव विविधता सम्मेलन और रामसर कन्वेंशन के लिए राष्ट्रीय संपर्क बिंदु के रूप में भी कार्य किया।
इसके बाद उन्होंने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग में पूर्णकालिक सदस्य एवं सदस्य सचिव के रूप में सेवाएँ दीं, और दिनांक 1 सितम्बर 2025 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण में विशेषज्ञ सदस्य के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।

