श्री सुधीर कुमार चतुर्वेदी, आईएफएस (सेवानिवृत्त), ने भारतीय वन सेवा (1986 बैच, गुजरात कैडर) में 37 वर्षों से अधिक समय तक सेवा की और दिसंबर 2023 में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, गुजरात के पद से सेवानिवृत्त हुए। वे वानिकी और कार्बनिक रसायन विज्ञान में स्नातकोत्तर हैं और उन्होंने वानिकी प्रशासन, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन, पर्यावरण प्रबंधन तथा सतत विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जिनमें गुजरात राज्य वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक के रूप में बड़ी स्तर पर वृक्षारोपण, लघु वनोपज के मूल्य संवर्धन और जनजातीय समुदायों के लाभ हेतु इको-टूरिज्म परियोजनाओं का नेतृत्व किया। गुजरात पारिस्थितिकी आयोग के सदस्य सचिव के रूप में उन्होंने तटीय क्षेत्र पुनर्स्थापन, मैंग्रोव पुनर्जनन और सामुदायिक आधारित संरक्षण को लागू किया।
गुजरात राज्य हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास निगम के प्रबंध निदेशक के रूप में उन्होंने संगठन को लाभकारी बनाया और 20,000 से अधिक कारीगरों की आजीविका को बल दिया।
उन्होंने एकता नगर पुनर्स्थापन जैसे प्रमुख हरित पहल का नेतृत्व किया तथा ग्रीन अरावली, ग्रीन पावागढ़, अर्बन फॉरेस्ट्स और मियावाकी प्लांटेशन जैसी अग्रणी योजनाओं का पर्यवेक्षण किया, जिससे एक लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र का पुनरुद्धार हुआ।
उन्होंने दिनांक 1 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण में विशेषज्ञ सदस्य के रूप में पदभार ग्रहण किया।
माननीय न्यायमूर्ति श्री एस के सिंह
माननीय न्यायमूर्ति श्री शिव कुमार सिंह ने वर्ष 1975 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक किया। उन्होंने वर्ष 1978 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विधि स्नातक (एल.एल.बी.) की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने वर्ष 1984 में न्यायिक सेवा में प्रवेश किया और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में जिला न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में रजिस्ट्रार (न्यायिक) तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रजिस्ट्रार जनरल के पद पर भी कार्य किया, इसके बाद उन्हें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। उन्हें राम जन्मभूमि, अयोध्या, फैज़ाबाद के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था (माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश द्वारा), ताकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की विशेषज्ञ टीम द्वारा किए जा रहे उत्खनन कार्य की निगरानी की जा सके। उन्होंने इस पद पर वर्ष 2005 से 2017 तक कार्य किया। उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया और उन्होंने वहाँ 16/01/2018 तक सेवा दी। इसके अतिरिक्त उन्होंने औद्योगिक न्यायाधिकरण, उत्तर प्रदेश में न्यायाधीश तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा गठित उत्तर प्रदेश की ओवरसाइट समिति के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।
उन्हें पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय दिनांक 11.03.2020 के आदेश संख्या 17(5)2019-PLNGT के माध्यम से राष्ट्रीय हरित अधिकरण में न्यायिक सदस्य नियुक्त किया गया। माननीय न्यायमूर्ति ने दिनांक 06.07.2023 की अधिसूचना संख्या F.No.17(30)/2017-PL के अनुसार राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष का कार्यभार संभाला। उन्होंने इस पद पर 22.08.2023 तक कार्य किया, जिसके पश्चात से वे मध्य आंचलिक पीठ, भोपाल में न्यायिक सदस्य के रूप में कार्यरत हैं।