श्री सैबल दासगुप्ता भारतीय वन सेवा के 1984 बैच के अधिकारी हैं, जो मध्य प्रदेश कैडर से संबंधित हैं। उन्होंने वनस्पति विज्ञान और वानिकी में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है तथा येल विश्वविद्यालय, अमेरिका से वन नीति में एक कोर्स भी किया है। उन्होंने राज्य स्तर तथा भारत सरकार में विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए वानिकी से जुड़े अनेक मुद्दों पर व्यापक अनुभव प्राप्त किया है। उन्हें वन एवं वन्यजीव प्रबंधन, वृक्षारोपण, सामुदायिक वन प्रबंधन, प्रशिक्षण एवं विस्तार कार्यों तथा मानव संसाधन विकास से संबंधित परियोजनाओं में कार्य करने का अनुभव है। विशेष रूप से उन्होंने प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने, प्रशिक्षण आवश्यकताओं के विश्लेषण, मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन, तथा जी.पी.एस. और जी.आई.एस. के उपयोग जैसे क्षेत्रों में कार्य किया है, जिन्हें यूरोपीय संघ, विश्व बैंक और खाद्य एवं कृषि संगठन जैसी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा वित्तपोषित किया गया।
देहरादून स्थित भारतीय वन सर्वेक्षण के महानिदेशक के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर वन संसाधन आकलन से जुड़े कार्यों जैसे वन आवरण मानचित्रण और वन एवं वन के बाहर पेड़ों की गणना का नेतृत्व किया। उन्होंने भारतीय वन सर्वेक्षण में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं के समन्वय में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे वर्ष 2005 के वन संसाधन आकलन के लिए भारत की रिपोर्ट प्रस्तुत करने में सम्मिलित रहे और 2010 की रिपोर्ट में भी आंशिक योगदान दिया।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में अतिरिक्त महानिदेशक के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर वन संरक्षण, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण, सर्वेक्षण एवं उपयोग, बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाएं तथा वन संरक्षण से संबंधित कार्यों का पर्यवेक्षण किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने कई राष्ट्रीय समितियों का नेतृत्व एवं अध्यक्षता भी की।
उनकी विशेषज्ञता के क्षेत्र में परियोजना निर्माण, विकास में सहभागी दृष्टिकोण, मानव संसाधन विकास, मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन, तथा प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (जिसमें वन्यजीव प्रबंधन भी शामिल है) में रिमोट सेंसिंग और जी.आई.एस. का उपयोग शामिल है।
उन्होंने सामुदायिक वन प्रबंधन, वन के बाहर पेड़ों की गणना हेतु प्रशिक्षण मैनुअल, फॉरेस्टरों के लिए सिस्टेमेटिक बॉटनी तथा भारत के वन संसाधनों की स्थिरता के आकलन पर चार पुस्तकें/मैनुअल प्रकाशित किए हैं। इसके अलावा उन्होंने वानिकी से संबंधित 5 पुस्तकों का संपादन/सह-लेखन किया है तथा कई तकनीकी बुलेटिन और शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। उनके 33 शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं।
वे इंटरनेशनल यूनियन ऑफ़ फारेस्ट रिसर्च आर्गेनाइजेशन्स सदस्य भी हैं तथा देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान सम विश्वविद्यालय के प्रबंधन बोर्ड के सदस्य के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उन्होंने एफ.ए.ओ. के ग्लोबल फॉरेस्ट रिसोर्स असेसमेंट 2020 के लिए भारत के राष्ट्रीय संवाददाता एवं सलाहकार समूह के सदस्य के रूप में भी कार्य किया।
सेवानिवृत्ति के बाद, वे दिनांक 1 नवंबर 2019 से 31 अक्तूबर 2022 तक राष्ट्रीय हरित अधिकरण में विशेषज्ञ सदस्य के रूप में कार्यरत रहे।

