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माननीय न्यायमूर्ति श्री सुधीर अग्रवाल

पूर्व न्यायमूर्ति श्री सुधीर अग्रवाल, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रहे, जो राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में दिनांक 30.09.2010 को दिए गए अपने ऐतिहासिक निर्णय के लिए प्रसिद्ध हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई पर्यावरणीय मामलों की भी सुनवाई की, जैसे गंगा प्रदूषण मामला, शंकरगढ़ के 47 गांवों में सिलिका रेत के अवैध खनन पर रोक और दोषियों के विरुद्ध सिविल एवं आपराधिक कार्रवाई, बायो-मेडिकल कचरे के उचित निपटान और प्रदूषण से बचाव हेतु अस्पतालों को आवासीय क्षेत्रों से हटाना, गाज़ियाबाद में ग्रीन बेल्ट पर अवैध निर्माण हटाना, सड़कों से कार पार्किंग हटाकर वाहन प्रदूषण कम करना, लखनऊ में गोमती नदी के कैचमेंट क्षेत्र पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई, शहरी क्षेत्रों में केबल बिछाने के लिए भूमि की अवैध खुदाई रोकना, कानपुर में हर्बल गार्डन के लिए आरक्षित भूमि पर बने अवैध मॉल/कॉम्प्लेक्स का ध्वस्तीकरण आदि।

न्यायमूर्ति अग्रवाल अपनी कड़ी मेहनत के लिए भी जाने जाते हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 1,40,000 से अधिक मामलों में निर्णय और आदेश दिए, जो लगभग हर क्षेत्र जैसे दीवानी, आपराधिक, सेवा, संवैधानिक, किराया, कर, पर्यावरण आदि से संबंधित थे।

बद्रिकाश्रम पीठ पर शंकराचार्य की स्थापना से संबंधित विवाद, उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य करना, सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों का इलाज केवल सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में कराना, दंगों में सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई उपद्रवियों से वसूलना आदि भी उनके कुछ प्रमुख निर्णयों में शामिल हैं।

न्यायाधीश बनने से पहले, दिनांक 05.10.2005 को पदोन्नति से पूर्व लगभग 15 वर्षों तक, न्यायमूर्ति अग्रवाल ने 25 वर्षों तक इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वकालत की। दिनांक 10.04.2004 को उन्हें उच्च न्यायालय द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया था और वे न्यायाधीश पद पर नियुक्त होने तक उत्तर प्रदेश राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता के पद पर भी कार्यरत रहे। प्रारंभ में उन्होंने कर और सेवा मामलों में प्रैक्टिस शुरू की, लेकिन बाद में सेवा और विद्युत मामलों में विशेषज्ञता प्राप्त की। वे उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड, उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद उच्च न्यायालय और उसके अधीनस्थ न्यायालयों के स्थायी अधिवक्ता भी रहे।

न्यायमूर्ति अग्रवाल दिनांक 23.04.2020 को उच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त हुए। दिनांक 06.04.2021 को उन्होंने राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नई दिल्ली में न्यायिक सदस्य के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।

 

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