माननीय न्यायमूर्ति श्रीमती पुष्पा सत्यनारायणन
माननीय न्यायमूर्ति श्रीमती पुष्पा सत्यनारायणन अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातक हैं। इसके बाद उन्होंने मद्रास लॉ कॉलेज से विधि (कानून) की डिग्री प्राप्त की।
उन्होंने वर्ष 1985 से मद्रास उच्च न्यायालय में सिविल कानून की सभी शाखाओं में वकालत प्रारम्भ की। वे एक प्रशिक्षित मध्यस्थ (Mediator) हैं और सोसाइटी फॉर अल्टरनेट डिस्प्यूट्स रेज़ोल्यूशन की सदस्य भी रही हैं। इसके अतिरिक्त वे हैदराबाद स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर अल्टरनेट डिस्प्यूट्स रेज़ोल्यूशन की आजीवन सदस्य हैं।
उन्हें मद्रास उच्च न्यायालय की न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया और उन्होंने 25.10.2013 को पदभार ग्रहण किया।
डिवीजन बेंच के निर्णय टी. के. शनमुगम बनाम तमिलनाडु राज्य, 2015 एस सी सी ऑनलाइन एम ए डी 9800 में निर्णय लिखते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे प्राधिकरण मानव जाति के हित के लिए स्वाभाविक रूप से बने जलाशयों या जलमार्गों को नष्ट नहीं कर सकते। राज्य के पास यह अधिकार नहीं है कि वे उनके प्रभाव की भरपाई किए बिना ऐसे जल स्रोतों को किसी अन्य उद्देश्य के लिए स्थानांतरित या पुनः वर्गीकृत कर दे।
उन्होंने “ऑल वुमन फुल बेंच” की अध्यक्षता भी की - जो उच्च न्यायालयों के इतिहास में अपने प्रकार की पहली पीठ थी। इस पीठ ने राज्य सरकार द्वारा जारी उन सरकारी आदेशों को बरकरार रखा, जिनके द्वारा निजी शैक्षणिक संस्थानों को भी कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम के अंतर्गत शामिल किया गया था।
सेवानिवृत्ति से पूर्व, मद्रास उच्च न्यायालय की जेंडर संवेदीकरण और आंतरिक शिकायत की पहली समिति की अध्यक्ष के रूप में उन्होंने सफाई कर्मचारी से लेकर रजिस्ट्रार स्तर के लगभग 2000 अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना था, जो कि कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के अनुरूप है।

