माननीय न्यायमूर्ति श्री लोकेश्वर सिंह पांटा का जन्म 23 अप्रैल 1944 को तहसील जुब्बल, जिला शिमला में हुआ।
स्नातक करने के बाद उन्होंने वर्ष 1970 में दिल्ली विश्वविद्यालय से एल.एल.बी. की डिग्री प्राप्त की। दिनांक 22 जुलाई 1970 को उन्होंने अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया। उन्होंने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में सेवा संबंधी मामलों, संवैधानिक, प्रशासनिक कानून, सिविल एवं श्रम कानून, आपराधिक कानून तथा कराधान के क्षेत्र में वकालत की।
उन्होंने वर्ष 1976-77 में उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के सचिव के रूप में कार्य किया तथा वर्ष 1986-87 में और दिनांक 15.07.1988 से दिनांक 16.12.1988 तक उपाध्यक्ष रहे। दिनांक 17.12.1988 से दिनांक 21.07.1989 तक वे उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे।
दिनांक 28 फरवरी 1980 को उन्हें हिमाचल प्रदेश का उप महाधिवक्ता नियुक्त किया गया। उन्होंने इस दौरान केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण और हिमाचल प्रदेश राज्य प्रशासनिक अधिकरण के समक्ष राज्य की ओर से मामलों का संचालन किया। इसी अवधि में दिसंबर 1988 से मार्च 1989 तक उन्हें महाधिवक्ता के कर्तव्यों और कार्यों का भी दायित्व सौंपा गया।
उन्होंने लोकायुक्त के समक्ष हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए वकील के रूप में पैरवी की। वे हिमाचल प्रदेश के महाधिवक्ता विभाग में सतर्कता अधिकारी भी रहे। वे भारतीय विधि संस्थान की कार्यकारिणी समिति के आजीवन सदस्य हैं तथा अखिल भारतीय विधि संस्थान राज्य इकाई की कार्यकारिणी परिषद के सदस्य भी रहे हैं। दिनांक 20 अगस्त 1991 को उन्हें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और दिनांक 28 जुलाई 1995 को स्थायी न्यायाधीश बनाया गया।
दिनांक 26 दिसंबर 1995 से उन्होंने हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष का पद संभाला। दिनांक 3 फरवरी 2006 को उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया और वहां से दिनांक 23 अप्रैल 2009 को सेवानिवृत्त हुए।
दिनांक 18 अक्टूबर 2010 को उन्हें राष्ट्रीय हरित अधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया और हिमाचल प्रदेश के लोकायुक्त के रूप में नियुक्त होने पर उन्होंने राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष के पद पर दिनांक 31 दिसंबर 2011 तक कार्य किया।

