उनका जन्म दिनांक 7 जुलाई 1953 को हरियाणा के हिसार में हुआ। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से बी.ए. (ऑनर्स) और एल.एल.बी. की पढ़ाई पूरी की। दिनांक 16 जुलाई 1974 को उन्हें पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकित किया गया। उन्होंने लगभग पाँच वर्षों तक पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में तथा लगभग 22 वर्षों तक भारत के सर्वोच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय में वकालत की। दिनांक 11 फरवरी 1999 को उन्हें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया। 2 जुलाई 2001 को उन्हें पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
दिनांक 2 मई से 12 सितंबर 2011 तक वे पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे। इसके बाद दिनांक 12 सितंबर 2011 को वे गुवाहाटी उच्च न्यायालय में वरिष्ठतम न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। 20 दिसंबर 2011 को उन्होंने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। दिनांक 12 अक्टूबर 2013 को स्थानांतरण के बाद उन्होंने उड़ीसा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की। दिनांक 7 जुलाई 2014 को उन्होंने भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण किया। दिनांक 6 जुलाई 2018 को उन्हें राष्ट्रीय हरित अधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। माननीय न्यायमूर्ति ने दिनांक 6 जुलाई 2023 तक इस पद पर कार्य किया।

