डॉ. प्रशांत गार्गव ने नागपुर विश्वविद्यालय से पर्यावरण अभियांत्रिकी में पीएच.डी. की है और उन्हें पर्यावरण शासन, अनुसंधान, नीति निर्माण तथा प्रशासन में लगभग 35 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने 1991 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में कार्यभार संभाला और 2018 से 2023 तक सदस्य सचिव के रूप में कार्य किया, इस दौरान उन्होंने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में कई महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी पदों पर सेवा दी।
उन्होंने भारत की वायु गुणवत्ता रूपरेखा को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे दिल्ली-एनसीआर के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के लेखक रहे, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम की परिकल्पना की, और वायु गुणवत्ता सूचकांक के विकास का नेतृत्व किया। उन्होंने छह-शहर स्रोत आवंटन अध्ययन का पर्यवेक्षण किया, UrbAirIndia (इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) की स्थापना की और वैश्विक स्वच्छ वायु रूपरेखाओं के सह-लेखक रहे।
उनके कार्यों में विभिन्न प्रकार के कचरे के लिए मानक एवं दिशानिर्देश विकसित करना, कोविड-19 के दौरान बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन प्रोटोकॉल तैयार करना, तथा सर्कुलर इकोनॉमी से संबंधित पहल शामिल हैं। वे स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर और आईआईटी दिल्ली में अतिथि संकाय के रूप में भी कार्यरत रहे हैं, जहाँ उन्होंने अनेक स्नातकोत्तर छात्रों तथा चार पीएच.डी. शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है। उन्होंने 80 से अधिक शोध-पत्र और तकनीकी रिपोर्ट प्रकाशित की हैं।
डॉ. गार्गव को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, जिनमें 2022 का हैगन-स्मिट क्लीन एयर अवॉर्ड (शामिल है, जो उन्हें अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व के लिए दिया गया। इसके अलावा उन्हें 2011 में फुलब्राइट पर्यावरण नेतृत्व फेलोशिप और वायु गुणवत्ता प्रबंधन लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (IICAQM – IITs और प्रमुख वैश्विक विश्वविद्यालयों के कंसोर्टियम द्वारा) भी प्राप्त हुआ है।
उन्होंने दिनांक 14 अगस्त 2025 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण में विशेषज्ञ सदस्य के रूप में पदभार ग्रहण किया।

